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मंगलवार, 21 अगस्त 2012

नारी के तुल्य केवल नारी


नारी के तुल्य केवल नारी 

     

                        

क्या कभी कोई कर पायेगा 
   तुलना नारी के नाम से,
     क्या कोई अदा कर पायेगा
         सेवा की कीमत दाम से.
 
नारी के जीवन का पल-पल
   नर सेवा में समर्पित है,
      नारी के रक्त का हरेक कण
          नर सम्मान में अर्पित है.
क्या चुका पायेगा कोई नर
   प्यार का बदला काम से,
       क्या कोई अदा कर पायेगा
           सेवा की कीमत दाम से

माँ के रूप में हो नारी
  तो बेटे की बगिया सींचें,
    पत्नी के रूप में होकर वह
       जीवन रथ को मिलकर खींचें.
क्या कर सकता है कोई नर
   दूर उनको मुश्किल तमाम से,
      क्या कोई अदा कर पायेगा
         सेवा की कीमत दाम से.
 
बहन के रूप में हो नारी
    तो भाई की सँभाल करे,
      बेटी के रूप में आकर वह
         पिता सम्मान का ख्याल करे.
क्या दे पायेगा उनको वह
   जीवन के सुख आराम से,
       क्या कोई अदा कर पायेगा
          सेवा की कीमत दाम से.

         शालिनी कौशिक
            [kaushal]

3 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

नारी की गरिमा और साहस को सलाम !

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सुन्दर नारी के विभिन्न रूपों का बहुत प्यारा वर्णन किया है कविता के माध्यम से चित्र भी बोल रहे हैं

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice.