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बुधवार, 5 जून 2013

शौहर की शर्ते -औरत तभी बनना मेरी बेगम !

Indian_bride : Beauty portrait of a young indian woman in traditional clothing with bridal makeup and jewelry, closeup shot Stock Photo
शौहर  की शर्ते !






















   ज़ुल्म सहने की हो ताकत तभी बनना मेरी बेगम ,
न कुछ कहने की हो आदत तभी बनना मेरी बेगम !

निकाह के वक़्त जब कबूल करने को कहें काजी ,
हमेशा कर सको खिदमत तभी बनना मेरी बेगम !

मेरे हर हुक्म को शबोरोज़ अगर कर सको पूरा ,
न हो और दिल में बगावत तभी बनना मेरी बेगम !

मेरी इज्ज़त बचाना जान देकर इस ज़माने में ,
हो तुममे मिटने की हिम्मत तभी बनना मेरी बेगम !

हदों में रहना तुम 'नूतन' यहीं हैं मर्द की शर्ते ,
रहो औकात में औरत तभी बनना मेरी बेगम !

शिखा कौशिक 'नूतन'

3 टिप्‍पणियां:

कालीपद प्रसाद ने कहा…

हर शेर लाजवाब है
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
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मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

आज भी औरत मजबूर है ....या कहे खुद से बहुत दूर है .
सुन्दर रचना !

Priyankaabhilaashi ने कहा…


वाह-वाह..क्या कह दिया आपने..!! पौरुष-दंभ के आगे कोई टिका है भला??