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सोमवार, 18 जनवरी 2016

यह कैसा स्वप्न

 कैसा यह स्वप्न
दादाजी , आज हम दोनों साथ-साथ खाना खाएंगे, साथ ही रात्रि सैर करने भी जायेंगे।,
कितने दिन हुए है, शतरंज की बाजी भी नही खेली।
दादी को भी टेनिस में हराना है।
मेरा दोस्त पल्लव हमेशा कहता रहता है कि "तेरे दादा-दादी तुझे कितना प्यार करते है हमेशा तेरे साथ भी रहते है।
तेरा होम - वर्क भी करवा देते होंगे न!
मेरे दादा- दादी तो बहुत दूर चले गए ,जब भी वो आते थे हम बहुत मस्ती करते थे।
दादा जी आज आज वादा करो कभी हमे छोड़ कर गाँव अकेले रहने नही जाओगे।,
आठ वर्ष का नन्हा नीरव सोते में कब से बड़बड़ा रहा है,पास ही में नीरव् के पापा सोच रहे है यह कैसा स्वप्न है । ग्लानि भरे भाव से पत्नी रमा की और ताक रहे है कि काश....
शान्ति पुरोहित

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