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शनिवार, 29 दिसंबर 2012

Our thoughts, prayers and love for the young Braveheart.

3 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

विनम्र श्रद्धांजलि

STRANGER ने कहा…

MAY LORD REST HER SOUL IN PEACE.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

आज हमारी सोसाइटी घिनौने जुर्मों से भर गयी है जिनमें से कुछ के नाम हमने लिए हैं.
ऐसा क्यों हुआ .
यह हमें सोचना होगा .
जुर्म के ख़िलाफ़ कम नहीं लिखा जा रहा है और रोज़ाना क़ानून भी बन रहे हैं . इसके बावजूद आज न तो औरत और बच्चे महफूज़ हैं और न ही स्वयं मर्द ही.
हमें सोचना होगा कि एक मुजरिम जुर्म क्यों करता है और उसकी मानसिकता को कैसे बदला जा सकता है .
अपने शुभ अशुभ कर्मों को हमें भोगना ही है.
यह विश्वास हमारे सबके मन में आ जाए तो हमारे विचार और कर्म निश्चित रूप से बदल जायेंगे.
आज हमें इस विश्वास की ऊर्जा से काम लेना होगा और यह विश्वास हम सबका साझा विश्वास है.
यही हमारा मक़सद है .