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सोमवार, 24 दिसंबर 2012

अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए


औरत ने जन्म दिया मर्दों को 
मर्दों ने मौत का सामान दिया 
कभी पर्वों में पूजा देवी कहकर
कभी सरे आम शर्मसार किया  
ये दोगली चाल  कुचलनी चाहिए 
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए
कभी  झूठी  दिखाई सहानुभूति 
अबला कह कर लाचार किया
कभी कुलटा दुश्चरित्रा कहा 
खुद ही अस्मत पर प्रहार किया 
सुप्त क्रोधाग्नि वो जलनी चाहिए 
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए 
वो  सहनशीलता अब ख़त्म हुई 
 अबला नारी खुद में  भस्म हुई
कब तक सोती वो  सजग हुई 
हर इक दिल  में अग्नि  प्रकट हुई
भय की परछाई निकलनी चाहिए 
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए
कोई आश्वासन नहीं चाहिए 
झूठे  रहम की भीख नहीं चाहिए 
अब आँख में आंसू नहीं आयेंगे 
अपना हक  खुद लड़   कर पायेंगे 
ये ज्वाला खून  में उबलनी  चाहिए
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए 
लुट रही अस्मतें  हो रहे बलात्कार 
चारों और चीत्कार ही चीत्कार
नहीं  कृष्ण धरा पर लेगा अवतार   
नहीं कोई अब होगा चमत्कार 
अब हर नारी में ही दुर्गा ढलनी  चाहिए 
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए 
अब तो तस्वीर बदलनी चाहिए 
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16 टिप्‍पणियां:

निर्जन ने कहा…

दुर्गा और काली बन तुझको
खडग उठानी चाहियें
सिंघनाद कर दुष्टों का
संहार करना चाहियें
रानी लक्ष्मीबाई बन
सर कलम कर देना चाहियें
आज सच इस कलयुग मैं
तस्वीर बदलनी चाहियें

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये तस्वीर जरूर बदलेगी .. युवा वर्ग का होंसला ये बतला रहा है ...

Rajesh Kumari ने कहा…

हार्दिक आभार दिगंबर नासवा जी एवं निर्जन जी रचना के अनुमोदन में अपना स्वर मिलाने हेतु

Akshitaa (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर ब्लॉग और सटीक बात।

Anita ने कहा…

सही कहा है..अब नारी को खुद ही आगे बढ़ना होगा..

ई. प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

liveaaryaavart.com ने कहा…

बेहतर लेखन,
जारी रहिये,
बधाई !!

Devdutta Prasoon ने कहा…

'ख्रीस्त-दिवस'की वधाई !
नारी विश्व की 'आधी शक्ति'है |उस का अनादर मानवता' का अनादर है और इस से मानवता कमज़ोर होगी अर्थात ;पशुता' को आमंत्रण होगा!

Rajesh Kumari ने कहा…

आप सभी का हार्दिक आभार

shalini ने कहा…

राजेश जी, बहुत ही सशक्त रचना ... बिल्कुल समय की माँग के अनुसार अभिव्यक्ति ..

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बदले बिना निस्तार नहीं है !

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बढ़िया सटीक रचना : इसी से मिलती
नई पोस्ट : "जागो कुम्भ कर्णों" , "गांधारी के राज में नारी "
'"सास भी कभी बहू थी ''http://kpk-vichar.blogspot.in, http://vicharanubhuti.blogspot.in

मन के - मनके ने कहा…

आपने ठीक कहा,’अब तो तस्वीर बदलनी चाहिये’
परंतु,विडंबना यही है—जो अस्मिता का हनन करते हैं
उन्हीं से न्याय की गुहार करते हैं.

ZEAL ने कहा…

bahut sateek likha hai aapne. We need to change with a jet speed now.

प्रेम सरोवर ने कहा…

तस्वीर जरूर बदलनी चाहिए, हमें ही इसे बदलना होगा। बहुत सुंदर पोस्ट। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है। धन्यवाद।

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक अभिव्यक्ति व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं