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शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

"करणी का फल "

"करणी का फल "
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आज सासु माँ की बहुत याद आ रही है , 
कड़ाके की ठंड में रात को दस बजे तक भी जब मैं अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर खाना नही बनाती थी,तो भी कभी कोई शिकायत नही करती मुझसे। 
रमा के आज एक-एक कर वो सब बाते फ़िल्म की तरह दिमाग में चल रही है।
रात को ही क्या दिन में भी यही हाल था। कई बार तो सासु माँ को इस अवस्था में खुद भी बनाकर खाना पड़ जाता था। 
अरे! आप बैठी -बैठी क्या सोच रही है मुझे महिला एवं बाल कल्याण दफ्तर में मीटिंग के लिए जाना है,,जल्दी से किचन में आईये और काम में हाथ बटाईए , बहू की रौबदार आवाज से नैना देवी की तन्द्रा भंग हुई।
शान्ति पुरोहित

4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-12-2015) को "पल में तोला पल में माशा" (चर्चा अंक-2203) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Shanti Purohit ने कहा…

हार्दिक आभार सर जी

Sanju ने कहा…

सुन्दर व सार्थक रचना...
नववर्ष मंगलमय हो।
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

Shanti Purohit ने कहा…

आभार संजू जी