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मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

" दोगलापन"

अरे माँ उठो! आज आने में थोडा लेट हो गयी, क्या करूँ! 
सासु माँ की तबियत आज सुबह से ठीक नही थी, तो किचन सम्भालना पड़ गया। पता नही बुढ़िया को ठंड कहाँ से लग गयी ! दो स्वेटर तो पहन कर रहती है ,फिर भी सुबह से खांस रही है।
विपिन तो है ही ममा पुत्र, जब विपिन घर से निकलते है तभी तो उसकी माँ से नौकरों जैसे काम करवा सकती हूँ 
रीटा ने माँ को गरमा गर्म टमाटर का सूप पिलाते हुए कहा
माँ सूप पीते हुए सोच रही थी, कि क्या ये मेरी बेटी की व्यहारिकता ठीक है!,
इसी उधेड़ बून में सूप की प्याली हाथ से गिर गयी ।
रीटा ने बड़े प्यार से माँ को सम्भाला ।
शान्ति पुरोहित

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