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बुधवार, 12 मार्च 2014

हूँ तो औरत जात ही ना !''-लघु कथा



एक कच्ची कोठरी में गुजर-बसर करने वाले राधे ने अपनी पत्नी को बाल संवारते हुए देखा और उसकी नज़र पत्नी की सूनी कलाई पर जाकर टिक गयी .पास ही दीवार पर टंगे कैलेण्डर में लक्ष्मी जी को देखकर राधे अपनी पत्नी से बोला -''काश मैं भी तुझे लक्ष्मी मैय्या जितने गहनों से लाद पाता पर देख तेरे पास तो पहनने के लिए कांच की चूड़ियाँ तक नहीं हैं .'' राधे की पत्नी मुस्कुराती हुई बोली -''दिल क्यूँ छोटा करते हो जी .....ये तो सोचो अगर मैं लक्ष्मी मैय्या जितने गहने पहन कर इस कोठरी में रहूंगी तो किसी दिन डकैत आ धमकेंगे !'' राधे पत्नी की बात पर ठहाका लगता हुआ बोला -'' बावली कहीं की ...जो तुझे इतने गहने पहनाने की मेरी औकात होगी तो क्या तुझे इस कोठरी में रखूंगा ?'' राधे की इस बात पर उसकी पत्नी अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोली -'' हा!!! लो ..ये बात तो मेरे मगज में ही नहीं आई ...हूँ तो औरत जात ही ना !''


                                                                                        शिखा कौशिक 'नूतन'

4 टिप्‍पणियां:

Shalini Kaushik ने कहा…

VERY NICE STORY .

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

सशक्त लघु कथा इस मिथ को पोसती दिखती है कि औरतों के पास भेजा नहीं होता या फिर भेजा उनकी गुद्दी में होता है। जबकि आधुनिक विज्ञान इसे सिर्फ रूढ़ि और घिसीपिटी सोच से प्रचलित मिथ ही मानता है यथार्थ यह है औरत और मर्द जात दोनों की मानसिक क्षमताएं जन्म से बराबर ही आती है फर्क परवरिश पर्यावरण से पैदा होता है।

sarika bera ने कहा…

aurat ko mahaj sabki khushi chahie hoti hain yah ghar or gahne uske kis kaam ke........????
nice story G....:-)

Neelam Samnani ने कहा…

Comment kya likho ..Hai tau hum sab aurat jaat hi na .. Par bahut khoob Aurat!!