समर्थक

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

मेरी शिकस्त को मौत मान बैठा है !


दिया जीने का नया मकसद, है अहसान किया ,
मेरे मक्कार मुख़ालिफ़ ने है अहसान किया !
....................................................
मेरे आंसू पे ज़रा हंसकर मुख़ालिफ़ ने मेरे ,
गिर के उठने का है तोहफा मुझे ईनाम दिया !
........................................................
मेरी शिकस्त को मौत मान बैठा है ,
मुख़ालिफ़ है रहमदिल मैय्यत का इंतज़ाम किया !
..........................................................
हादसे झेल जाऊं मुख़ालिफ़ ने दी हिम्मत मुझको ,
मुझे उकसाकर ज़र्रे से आसमान किया !
...........................................................
मैं तो मर जाता अगर मुख़ालिफ़ न होता मेरा ,
मैंने हर जीत पर 'नूतन' उसे सलाम किया !

शिखा कौशिक 'नूतन'

1 टिप्पणी:

parmeshwari choudhary ने कहा…

मैं तो मर जाता अगर मुख़ालिफ़ न होता मेरा ,
मैंने हर जीत पर 'नूतन' उसे सलाम किया !
बहुत खूब