समर्थक

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

चला काटने किसको बन्दे ?

As communal violence continued for the third day in Muzaffarnagar and its surrounding areas, five more deaths were reported on September 9, taking the toll to 31, while at least 50 were reported to be injured. While police said violence had shifted away from villages that were affected over the last 48 hours, senior officials said mobs were targeting those trying to flee their villages. (IE Photo: Ravi Kanojia)
चला काटने किसको बन्दे चल पहले तू मुझको काट ,
ना हिन्दू को ना मुस्लिम को सबसे पहले मुझको काट !
..................................................................
जिस दिल में ज़ज्बात भरे हैं जिस दिल में है रहम भरा ,
नफरत की तलवारे लेकर काट सके तो उसको काट !
............................................................
इसकी माता ,तेरी भाभी ,उसकी बेटी ,बहन मेरी ,
चले लूटने अस्मत इनकी पहले उन हाथों को काट !
.............................................................................
आपस में ही क़त्ल हो रहे गैरों के भड़काने से ,
ज़हर उगलती रहती है जो ऐसी हरेक जुबां को काट !
.......................................................................
मैं मंदिर में ,मैं मस्ज़िद में ,मैं गिरिजा -गरुद्वारे में ,
सब मुझमें हैं ,मैं सबमे हूँ ,'नूतन' मज़हब में ना बाँट !
शिखा कौशिक 'नूतन'

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Digamber Naswa ने कहा…

सटीक और सार्थक अभिव्यक्ति ... न जाने इन्सान को का समझ आयेगी ...