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बुधवार, 13 मई 2015

खट्टी -मीठी यादें !


खट्टी -मीठी यादें !
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टूटे  फूटे  वादे    ,कभी     ताने  और     फरियादें     ,
इनसे   ही   बन   जाती   हैं   खट्टी मीठी यादें .

फूलों   के   जैसे   हँसना   ,आँखों   से   मोती   झरना   ,
मरते   मरते   जीना   ,कभी    जीते   जीते   मरना   ,
ऐसे   जुड़ते   जाते   किस्से   ये   सीधे   सादे   .
इनसे   ही   बन   जाती   हैं   खट्टी मीठी यादें .
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गले लगाकर मिलना ,लड़ना और झगड़ना ,
ममता की बरसातें और कभी क्रोध में तपना ,
फिर भी जुड़ते जाते टूटे रिश्तों के धागे .
इनसे ही बन जाती हैं खट्टी मीठी यादें .
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कभी जेठ की गर्मी ,सावन की कभी फुहारें ,
कभी अमावस की रजनी ,कभी पूनम के उजियारे ,
कुदरत रोज बजाती नए सुरों में बाजें .
इनसे ही बन  जाती हैं खट्टी मीठी यादें .
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SHIKHA KAUSHIK 'NUTAN'



2 टिप्‍पणियां:

Ritu Asooja Rishikesh ने कहा…

बिलकुल सच

Asha Joglekar ने कहा…

वाह यादों के उद्गमों का क्या समा बांधा है।
बहुत सुंदर।