समर्थक

सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

कुछ पन्ने )

लघु कथा ( कुछ पन्ने )
कोई पंगे मत लेना मुझसे ! कह दिया बस , लोग समझते क्या हैं खुद को जब देखो टोकते हैं लड़की हूँ तो क्या हुआ , अपने बाप के घर का खाती हूँ , नही करनी मुझे शादी अभी , कल मेरे माँ-बाप बीमार होंगे तो कौन आएगा रोटी देने ? मेरा पति भी कह देगा तेरे बाप के लिय कमाता हूँ क्या ? मुझे अपने पैरो पर खडा होना हैं फिर सोचेंगे शादी का , आजाते हैं समाज के ठेकेदार बनके , ऐसे रिश्ते ले आते जिनका मेरे साथ कोई मैच ही नही ...मुझे बस पढना हैं ...शांत रे मन शांत !! यह वक़्त भी गुजार ले .
ऋचा ने डायरी में सब लिखा और चल दी चाय बनाने नीना मासी के लिय ..... बाहर नीना मासी लड़के के गुण बता रही थी
२२ हजार कमाता हैं कॉल सेंटर में
अब गुस्सा कही तो निकलना था ना

नीलिमा शर्मा निविया 

3 टिप्‍पणियां:

shikha kaushik ने कहा…

sarthak laghu katha hetu aabhar

Neelima sharma ने कहा…

शुक्रिया शिखा जी

shilpa bhartiya ने कहा…

स्त्री व्यथा की लघु कथा..सुंदर प्रस्तुति!