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सोमवार, 12 अगस्त 2013

दोनों ही उत्सव हैं बंधु जीवन की सौगात !

Funeral : White casket covered with floral arrangements at a funeral service
आज  है मैंने अर्थी  देखी  कल  देखी  बारात  ,
दोनों ही उत्सव  हैं बंधु  जीवन  की सौगात  !
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बजते द्वारे ढोल -नगाड़े थाल बजाये जाते ,
विवाह-जन्म के उत्सव आँगन को चहकाते  ,
मगर खड़ी होती है एक दिन द्वारे उलटी खाट !
दोनों ही उत्सव  हैं बंधु  जीवन  की सौगात  !
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बारातों में बाराती बन शामिल होते हम सब  ,
अर्थी के पीछे चलते कर राम नाम का हम जप ,
विवाह के मंडप देखे हमने देखे शमशान -घाट !
दोनों ही उत्सव  हैं बंधु  जीवन  की सौगात  !
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शहनाई -किलकारी से आनंदित घर और आँगन ,
और कभी सन्नाटे भीषण चिर वियोग के कारण ,
कभी गुलाबी सर्दी के दिन कभी गम की है बरसात !
दोनों ही उत्सव  हैं बंधु  जीवन  की सौगात  !

शिखा कौशिक 'नूतन'

5 टिप्‍पणियां:

कालीपद प्रसाद ने कहा…

आज है मैंने अर्थी देखी कल देखी बारात ,
दोनों ही उत्सव हैं बंधु जीवन की सौगात !

जीवन के कटु सत्य को उकेरती सुन्दर रचना
latest post नेता उवाच !!!
latest post नेताजी सुनिए !!!

Kuldeep Thakur ने कहा…

आप ने लिखा... हमने पढ़ा... और भी पढ़ें... इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 16-08-2013 की http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस हलचल में शामिल रचनाओं पर भी अपनी टिप्पणी दें...
और आप के अनुमोल सुझावों का स्वागत है...




कुलदीप ठाकुर [मन का मंथन]

कविता मंच... हम सब का मंच...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जीवन की सौगात ... सच है जीवन मृत्यु अपने बस में नहीं होते ... सौगात है समय की ..

Neelima sharma ने कहा…

अच्छी रचना

शिवनाथ कुमार ने कहा…

जन्म और मृत्यु दोनों सौगात ही हैं
सुन्दर