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शनिवार, 24 मई 2014

जिद

लघु कथा
एक व्यक्ति अपने खेत में काम कर रहा था । काम करते करते उसे ऐसा लगा की उसके साथ कुछ बुरा होने वाला है ।पर करे क्या तभी उसने देखा की एक आदमी इधर ही आ रहा है । उसने उस आदमी को कहा " शक्ल से ब्राह्मण लगते हो जरुर हाथ देखना जानते होंगे ।उसने कहा " नही जानता ; पर वो तो पीछे ही पड़ गया । " तुम बताते हो की नहीं? ' यहाँ तुम्हे बचाने वाला कोई नहीं है , डरते हुए उसने कह दिया की तुम जल्दी नहीं मरोगे बहुत उम्र है तुम्हारी । उसने कहा " ऐसे मै नहीं मानता तुम कुछ सबूत दो जिससे लगे कि जो तुमने कहा है वो सत्य है । बेचारा डरने लगा और अपने बचाव के लिए उसके हाथ पर एक धागा बांध दिया और कहा जिस दिन ये टूट जाये समझ लेना तुम मर गये । धागा कितने दिन चलने वाला था | वो धागा दो माह बाद एक दिन टूट गया । तो वो अपनी औरत से बोला " मै आज मर गया हूँ तुम रॊओ । वो बोली ऐसे कैसे मर गये मान लूँ! तुम तो जिन्दा हो ! पर वो नहीं माना तो वो रोने लगी ।रोना सुनकर पडौसी आ गये उस व्यक्ति ने सबको यही कहा मै मर गया हूँ, मुझे जलाने ले चलो ।सबने बहुत समझाया पर किसी से भी नही माना तो लोगो ने उसे अर्थी में बांध कर श्मशान भूमि ले जाने लगे । रास्ते में एक आदमी उन लोगो से रास्ता पूछ रहे थे | । कोई भी ठीक से नहीं बता पा रहा था । तो वो व्यक्ति अर्थी में से ही बोला कि पहले तो ये सडक इधर से ही जाती थी जब में जिन्दा था, अब पता नहीं । पता पूछने वाले लोगो ने कहा ये आदमी जिन्दा है आप इसे जिंदा को ऐसे क्यों ले जा रहे हो । बहुत कहने पर भी वो नही माना तो उस व्यक्ति ने उस अर्थी में लेटे हुए आदमी के एक थप्पड़ जोर से मारा तो वो रोने चिल्लाने लगा । थप्पड़ मारने वाले आदमी ने कहा की तुम जिन्दा हो मरे हुए को मारने से तकलीफ नहीं होती है| ना ही वो रोता है अब उस व्यक्ति के सब समझ आ गया कि उसने तो मना ही किया था कि मुझे कुछ नहीं आता । मैंने ही जिद की तो आज ये दिन देखना पड़ा |
शांति पुरोहित

2 टिप्‍पणियां:

shilpa bhartiya ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति!

Anita ने कहा…

हा..हा.. हा