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रविवार, 29 मार्च 2015

सबसे सुन्दर लड़का -लघु कथा

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वो खूबसूरत लड़की जब सड़क पर चलती थी तब अपने में ही खोई रहती . उसको खबर न होती कि कोई लड़का उसका पीछा कर रहा है . एक दिन एक संकरी गली में उस पीछा करने वाले लड़के ने आगे आकर उसका रास्ता रोक लिया .वो घबराई .उसकी नीली झील सी आँखों में आंसू भर आये .उसने हाथ जोड़कर  कहा - ''मुझे जाने  दो '' .यदि किसी ने मुझे तुमसे बात करते देख लिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी .मैं लड़की हूँ ना !'' लड़का थोड़े रोष में बोला -'' तुम क्या समझती हो मैं तुम्हे बदनाम करने के लिए तुम्हारा पीछा करता हूँ .तुम तो इतनी बेखबर होकर चलती हो सड़क पर कि न जाने कब कोई गुंडा-मवाली  तुम्हे कहीं ऐसी ही सूनसान गली में दबोच ले और तुमको हवस का शिकार बना ले .मैं कई दिन से तुम्हे यही समझाने के लिए तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ कि तुम एक लड़की हो इसलिए नज़रे उठाकर , सावधान रहकर ,आत्म-विश्वास के साथ सड़क पर चलो .समझी !'' खूबसूरत लड़की ने आँखें उठाकर देखा दुनिया का सबसे सुन्दर लड़का उसके सामने खड़ा था .  

डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन'

शुक्रवार, 27 मार्च 2015

नन्हें से राम लल्ला खेलें दशरथ के अंगना !

! रामनवमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !
किलकारी मारें बजाकर खन खन कंगना ,
नन्हें से राम लल्ला खेलें  दशरथ के अंगना !


मैय्या कौशल्या उर आनंद लहरे उमड़े ,
पैय्या चले तो पकड़ने को वे दौड़े ,
लेती बलैय्या आँचल में हैं छिपती ललना !
नन्हें से राम लल्ला खेलें  दशरथ के अंगना !

चारों भैय्या मिलकर माखन चुराते हैं ,
बड़े हैं भाई राम सबको खिलाते हैं ,
माटी के बर्तन फोड़ें आये पकड़ में ना !
 नन्हें से राम लल्ला खेलें  दशरथ के अंगना !

राम के मुख की शोभा बरनि न जाये है ,
सुन्दरता देख उन्हें खुद पर लजाये है ,
शोभा की खान राम किसी से क्या तुलना !
 नन्हें से राम लल्ला खेलें  दशरथ के अंगना !

            शिखा कौशिक 'नूतन '

सोमवार, 23 मार्च 2015

अन्नदाता की मौत !

 Video for farmers suciding after rain in up

Farmers commit suicide after rains devastate crops in UP .

इस बार
आसमान से
जल नहीं बरसा
बरसी है आग !
जिसने जला  डाले
किसानों के
सारे ख्वाब !
कोई सदमे से मर गया ,
किसी ने खाया ज़हर ,
कोई फांसी से लटक गया
और कोई गया जल ,
बरसात थी या थी कहर !
ऊपर वाले कैसा
तेरा
इंसाफ ?
खून-पसीने से खड़ी
फसल का
ये कैसा
सत्यानाश ?
हर अन्नदाता की
मौत पर ,
ह्रदय में उठता
है ये प्रश्न ?
किस करुणानिधान ने
किया ये कर्म
इतना निर्मम बन ?

शिखा कौशिक 'नूतन'

शनिवार, 21 मार्च 2015

प्रिय की दृष्टि में प्रेयसी !


पीत वसन में लगती हो तुम

महारानी मधुमास की !

ओढ़ दुपट्टा रंग गुलाबी

लगती कली गुलाब की !

वसन आसमानी कर धारण

खिल जाता है गौर वदन !

लाल रंग के वस्त्रों में तुम

दहकी लता पलाश की !

हरा रंग तो तुम पर जैसे

नयी बहारें लाता है !

हरियाली पीली पड़ जाती

रूप तुम्हारा देखकर !

श्वेत वसन में तुम्हें देखकर

मुझको ऐसा लगता है ,

आई चांदनी आज धरा पर

छवि तुम्हारा धर कर है !



शिखा कौशिक 'नूतन' :

शनिवार, 14 मार्च 2015

औरत बेचीं जाती है

Indian_bride : Portrait of young beautiful  woman in traditional indian costume
नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी कहते हैं कि बेटियां जानवरों की तरह बिकती हैं। उन्हें 5 हजार में खरीदकर एक लाख में बेचा जाता है। देशभर में भीख मांगने वाले बच्चों के पीछे भी बड़े गिरोह का हाथ है।


तोल तराजू  इस  दुनिया  में औरत बेचीं जाती है ,
आग लगे सारी  दुनिया में औरत बेचीजाती है !
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गोरी- काली,लंगड़ी -लूली ,लम्बी- छोटी कैसी भी ,
तय कीमत पर बाज़ारों में औरत  बेची जाती है !
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हाय गरीबी तेरे कारण बापों ने बेची बिटिया  ,
उस ही घर में जलता चूल्हा जिसमे औरत बेची जाती है !
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नेता अभिनेता व्यापारी सब को होता सप्लाई ,
माल बनाकर कोठी बंगलों में औरत बेची जाती है !
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डूब मरे 'नूतन' चुल्लू भर पानी में वे मर्द सभी ,
जिनके रहते इस दुनिया में औरत बेची जाती है !


शिखा कौशिक  'नूतन' 

शनिवार, 7 मार्च 2015

गर्व करो खुद पर कि स्त्री हो तुम !

चुप क्यों रहती हो तुम
घाव क्यों सहती हो तो
क्या दर्द नहीं होता तुम्हे
क्या कोई तकलीफ नहीं होती
आखिर किस मिट्टी की बनी हो तुम
या सिर्फ मिट्टी की ही बनी हो तुम
या इस देह के भीतर कोई आत्मा भी है
क्या वो तुम्हे धिक्कारती नहीं
क्या सम्वेदनाएँ तुम्हारी
कभी तुम्हे खुद के लिये पुकारती नहीं
जानती हो कि जुल्म करने वाले से बड़ा गुनाहगार
जुल्म सहने वाला होता है
फिर क्यों जुल्म किसी के सहती हो तुम
कुछ तो बोलो
लब तो खोलो
बोलो कि तुम मात्र एक देह नहीं हो
दिल है तुम्हारे सीने में जो धड़कता है
एक आत्मा बसती तुममे भी
बोलो कि दर्द तुम्हे भी होता है
जब बिन बात सताई जाती हो
बेवजह कोख में मिटाई जाती हो
जब दहेज की आग में जलाई जाती हो
हवस भरी गिद्ध नजरे
जब तुम्हारे जिस्म को भेदती है
वासना के पंजो तले
जब देह से लेकर आत्मा तक रौंदी जाती है
और उँगलियाँ जमाने की गुनाहगारो की बजाय
तुम्हारे ही चरित्र पर उठाई जाती है
तब किन किन तकलीफों से गुजरती हो तुम
ये सब क्यों नहीं कहती हो तुम
अरे क्यों चुप रहती हो तुम
अरे हाँ बोलोगी भी कैसे
लब खोलोगी कैसे
बचपन से तो तुमने ये ही सीखा है
शर्म स्त्री का गहना है
कोई कुछ भी कहे कुछ भी करे
तुम्हे अपनी मर्यादा में रहना है
संस्कारो की बेडियाँ डाले
घुट घुट के मर जाना
पर आवाज मत उठाना
वरना लोग क्या कहेंगे
क्या सोचेंगे क्या समझेंगे
अरे कोई कुछ नही सोचता तुम्हारे बारे में 
न ही कोई तुम्हे कुछ समझता है
क्योकि खुद को कुछ नही समझती हो तुम
कभी देवी बनाकर मंदिरों में बिठाई गयी
कभी कोठो पर नचाई गयी
कभी डायन कहकर
सरेआम निर्वस्त्र घुमाई गयी
जब चाहा इन ज़मीं के देवताओ ने
व्यक्तित्व से तुम्हारे खिलवाड़ किया
स्वार्थ के लिये जैसे चाहा रूप तुम्हारा गढ़ दिया
और उसे ही अपना मुकद्दर मानबैठी हो तुम
माँ हो बेटी हो
बहन हो बीवी हो
हर रिश्ते तुम्हे याद रहते है
पर तुम्हारा खुद से भी है इक रिश्ता
ये क्यों भूल जाती हो तुम
इन सबसे परे खुद का भी
इक अस्तित्व है तुम्हारा
कि इन सबसे जुदा
इक व्यक्तित्व है तुम्हारा
 आखिर किस बात की कमी है तुममे 

क्यों खुद को औरो से हीन समझती हो तुम 
महसूस तो करो जरा कि देखो 
दुनिया के इस चमन अपने हुनर की खुश्बू लिये 
किस कदर खिलती हो तुम
अरे पहले ढूंढो तो खुद को फिर देखो
 धरती से लेकर अंतरिक्ष तक 
कामयाबी की दास्ताँ लिखती हुई मिलती हो तुम
रचा है तुम्हे भी खुदा ने अपने हाथो से
कि उस ईश्वर की सबसे खूबसूरत कृति हो तुम
गर्व करो खुद पर कि स्त्री हो तुम!

शिल्पा भारतीय"अभिव्यक्ति"